BSE Odisha Class 9 Hindi Book Chapter 11 Question Answer | Odisha Board Class 9 Hindi Book Chapter 11 Solutions | Class 9 Hindi Chapter 11 Question Answer Odia Medium

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श्रम की प्रतिष्ठा

प्रश्न और अभ्यास

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दीजिए।

(क) कर्मयोगी होने पर कौन-सा फायदा मिलता है?

उत्तर: कर्मयोगी होने पर यह फायदा मिलता है कि कर्मयोगी जीवन में पाप का आसानी से प्रवेश नहीं हो सकता। दिन भर कर्म करने हेतु पाप-चिंतन को समय नहीं मिलता और रात को थका -माँदा शरीर आराम चाहता है। वे श्रम से रोजी रोटी कमाते है।

(ख) फुरसती लोगों को कर्मयोगी क्यों कहा नहीं जा सकता?

उत्तर: फुरसती लोग कार्य में रूचि नहीं रखते। इसके साथ साथ अपने कार्य को भी टाल जाते हैं। वे कार्य को वाध्य होकर करते तथा वे कर्म से छुटकारा पाना चाहते हैं। इस प्रकार के लोगों को कर्मयोगी नहीं कहा जा सकता ।

 

(ग) देहाती लोग अपने बच्चों को तालीम देनेकी बात क्यों करते हैं?

उत्तर: देहाती लोग अपने बच्चों को तालीम देना इसलिए चाहते हैं। ताकि उनके बच्चों को नौकरी मिलेगी और वे जिस तरह दिन भर कठिन श्रम करते हैं, वैसे उनके बच्चों को करना न पड़े।

(घ) भगवान् कृष्ण ने श्रम का आदर कैसे किया |

उत्तर: भगवान् कृष्ण ने श्रम का आदर इसलिए किया कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है। दृष्टान्त यह है कि कृष्ण ने राजसूय यज्ञ में जूठी पत्तले उठाने का काम लिया।

(ङ) ज्ञानी और मजदूर में क्या फर्क होता है?

उत्तर: ज्ञानी खा सकते हैं। आशीर्वाद दे सकते हैं। काम नहीं कर सकते । ज्ञानी को काम करना नहीं चाहिए। मजदूर सवेरे में उठकर कठिन परिश्रम करते हैं और वे शेषनाग कहलाते हैं।

(च) शारीरिक और दिमागी श्रम की प्रतिष्ठा कैसे बढ़ सकती है?

उत्तर: शारीरिक श्रम को हम नीच मानते हैं। दिमागी श्रम को ज्याद गुरुत्व देते हैं। शारीरिक और दिमागी श्रम का मूल्य समान होना जरूरी है। दोनों श्रम करनेवालों को समान सुविधा और सुयोग प्रदान करने से ही श्रम की प्रतिष्ठा बढ़ेगी ।

2. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए |

(क) शेषनाग किसे कहा गया है?

उत्तर:
दिनभर शरीर – श्रम करने वाले मजदूर जो किस्म-किस्म की पैदावार करते है उसे शेषनाग कहा गया है।

(ख) कौन धर्म-पुरुष हो जाता है?

उत्तर:
जो शख्स पसीने से रोटी कमाता है वह धर्मपुरुष हो जाता है ।

(ग) किसके जीवन में पाप का आसानी से प्रवेश नहीं हो सकता?

उत्तर: धर्म-पुरुष के जीवन में पाप का आसानी से प्रवेश नहीं हो सकता।

(घ) किसे कर्मयोगी कहा जा सकता है?

उत्तर: मजदूरों को कर्मयोगी कहा जा सकता है ।

(ङ) फुरसती लोगों के जीवन में पाप क्यों दीखता है?

उत्तर:
फुरसती लोगों के जीवन में शैतान का काम शुरू होता है, इसलिए जीवन में पाप दीखता है।

(च) मजदूरों को नीच कौन समझता है?
उत्तर:
दीमागी काम करने वाले लोग मजदूरों को नीच समझते हैं।

(छ) किसने कहा कि सीता को दीप की बाती भी जलाने नहीं आती?

उत्तर:
कौशल्या ने कहा कि सीता को दीप की बाती भी जलाने नहीं आती।

(ज) कृष्ण ने धर्मराज से क्या कहा?

उत्तर: कृष्ण ने धर्मराज से कहा कि “मुझे भी काम दो ।”

(झ) ज्ञानी क्या नहीं कर सकते?

उत्तर:
ज्ञानी काम नहीं कर सकते।

(ञ) कौन मजदूर कहलाएगा?

उत्तर: जो सबेरे उठकर पीसता है वह मजदूर कहलाएगा ।

(ट) किसका जीवन धार्मिक नहीं होता

उत्तर:
जो व्यक्ति काम टालते हैं और काम नहीं करते उसका जीवन धार्मिक नहीं होता।

(ठ) हम काम की इज्जत नहीं करते तो कौन-सा कार्य खोते हैं?
उत्तर:
हम काम की इज्जत नहीं करते तो बड़ा भारी धर्मकार्य खोते हैं।

(ड) ब्राह्मण को अपरिग्रही क्यों माना गया था?

उत्तर:
ब्राह्मण सिर्फ धोती और खाने का अधिकारी होने के साथ ज्ञानी होता था, इसलिए अपरिग्रही माना गया था।

(ढ) कब श्रम की प्रतिष्ठा होगी?
उत्तर:
जब सब लोग श्रम करेंगे और कामों का मूल्य समान होगा तब श्रम की प्रतिष्ठा होगी ।

3. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर एक-एक शब्द में दीजिए।

(क) यह पृथ्वी किसके मस्तक पर स्थित है?

उत्तर:
शेषनाग

(ख) भगवान् ने किसे कर्मयोगी कहा है?

उत्तर:
भगवान ने मजदूर को कर्मयोगी कहा है ।

(ग) अपने पसीने से कौन रोटी कमाता है?

उत्तर:
मजदूर

(घ) किसे कर्मयोगी कहा नहीं जा सकता?

उत्तर:
जो श्रम को टालता है उसे कर्मयोगी कहा नहीं जा सकता ।

(ङ) जहां समय फाजिल पड़ा होता है, वहां किसका काम शुरू हो जाता है?

उत्तर:
शैतान का

(च) किन-किन लोगों के जीवन में पाप दिखता है?
उत्तर:
फुरसती लोगों के जीवन में पाप दिखता है ।

(छ) कौन कहता है कि उनके बच्चों को तालीम मिलनी चाहिए?

उत्तर:
देहातीलोग

(ज) राजसूय यज्ञ किसने किया था?

उत्तर:
राजसूय यज्ञ धर्मराज युधिष्ठिर ने किया था।

(झ) कौन-से श्रम की प्रतिष्ठा मानी गयी है?

उत्तर:
दिमागी काम

(अ) दिमागी काम कौन करता था?

उत्तर: दीमागी काम महात्मा गांधी करते थे ।

(ट) अपरिग्रही किसे माना गया था?

उत्तर:
ब्राह्मण

(ठ) बिना काम किये हमारा जीवन कैसा बनता है?

उत्तर: बिना काम किये हमारा जीवन पापी बनता है।

(ड) किसका मूल्य समान होना चाहिए?

उत्तर:
काम का

4. निम्नलिखित अवतरणों का आशय स्पष्ट कीजिए।

(क) लेकिन सिर्फ कर्म करने से कोई कर्मयोगी नहीं होता।

उत्तर: सिर्फ कर्म करने से कोई कर्मयोगी नहीं होता कारण वे कर्म को पूजा समझकर नहीं करते। इनके कर्म में प्रेम का अभाव रहता है । वे उसे बोझ समझकर करते हैं। दिनभर कर्म में ब्यस्त रहने के बावजूद भी मजदूरों के जीवन में कई पाप दिखते हैं । इसलिए वे कर्मयोगी नहीं होते |

(ख) जहाँ समय फाजिल पड़ा है, वहाँ शैतान का काम शुरू हो जाता है।

उत्तर:
यह गद्यखण्ड ‘श्रम की प्रतिष्ठा’ से लिया गया है। इस पर विनोबाजी ने समय के व्यवहार पर चर्चा की। जो व्यक्ति के पास समय आवश्यकता से अधिक है, वे समय को ठिक रूप से सद्व्यवहार नहीं कर सकता है। उसके जीवन मे पाप दिखता है। कर्म को पूजा नहीं समझते। वे हमेशा कुचिन्ता में फस जाता है।

(ग) ज्ञानी तो खा सकते हैं और आशीर्वाद दे सकते हैं; काम नहीं कर सकते।

उत्तर:
यह अवतरण ‘श्रम की प्रतिष्ठा’ से लिया गया है। यहाँ विनोबाजी ने ज्ञानी के काम पर गुरुत्व दिया है। ज्ञानी खाता और आशीर्वाद देता इसलिए कि उसके पास ज्ञान और विबेक दोनों हैं । कोई सवेरे उठकर पीसता है वे ज्ञानी नहीं, मजदूर कहलायेगा। बूढ़ों और बच्चों को काम देना निष्ठुरता है। इसलिए बूढ़ो को काम से मुक्त रहना ठीक है।

(घ) अगर हम बिना काम किये खाते हैं तो हमारा जीवन पापी बनता है।

उत्तर: प्रस्तुत गद्यांश ‘श्रम की प्रतिष्ठा’ नामक निबंध से लिया गया है। इस रचना के लेखक आचार्य विनोबा भावे जी हैं लेखक ने काम के महत्व पर प्रकाश डाला है । लेखक के अनुसार, काम बन्द हो सकता है पर भूख बन्द नहीं हो सकती । इसलिए हर व्यक्ति को अपनी आवश्यकता क पूर्ति के लिए थोड़ा-थोड़ा श्रम करना जरुरी माना जाता है । अपनी भूख को शांत करने के लिए थोड़ी-थोड़ी पैदावर बढ़ानी चाहिए। ताकि कभी किसी चीज का अभाव का सामना न करना पड़े और जब ऐसा होगा तो श्रम की प्रतिष्ठा होगी ।

(ङ) प्रस्तुत निबंध से हमें कौन-सी शिक्षा मिलती है?

उत्तर: प्रस्तुत निबंध से यह शिक्षा मिलती है कि प्रत्येक व्यक्ति को कुछ-न-कुछ श्रम करना चाहिए। निबन्धकार के विचार है कि जो अपने पसीने से रोटी कमाता है, वह पाप कर्मों से कोसो भागता है। शारीरिक श्रम और दिमागी काम का मूल्य समान होना जरूरी ह

5. रिक्त स्थानों को भरिए।

(क) इसलिए भगवान् ने ______ कर्मयोगी कहा है।
उत्तर:
मजदूरो

(ख) ऐसा इसलिए होता है कि वे कर्म को _______ नहीं समझते।
उत्तर:
पूजा,

(ग) भगवान् ने कहा, आदरणीय हैं तो क्या ___________ हैं?
उत्तर:
नालायक,

(घ) दिमागी काम करनेवालों को भी __________ दिये हैं।
उत्तर:
हाथ

(ङ) ____________ जो ज्ञानी होता था, पढ़ाता था।
उत्तर:
ब्राह्मण

भाषा-ज्ञान

1. ‘देहाती’ शब्द देहात के साथ ‘ई’ प्रत्यय के योग से बना है। शब्द के अंत में आनेवाले, शब्दांशों को प्रत्यय कहते हैं। यहाँ ‘ई’ एक तद्धित प्रत्यय है। हिन्दी में दो प्रत्यय होते हैं – कृदन्त और तद्धित
उपर्युक्त उदाहरण की तरह ‘ई’ प्रत्यय के योग से बननेवाले शब्दों को प्रस्तुत निबंध से खोजकर लिखिए

उत्तर:
कर्मयोगी, आसानी, मजदूरी, नौकरी, ज्ञानी, बेकारी, ब्यापारी, लाचारी, पापी, अधिकारी, उपकारी। ‘यह पृथ्वी शेषनाग के मस्तक पर स्थित है’।

2. ‘यह पृथ्वी शेषनाग के मस्तक पर स्थित है’।
इस वाक्य में प्रयुक्त ‘पर’ अधिकरण कारक की सप्तमी विभक्ति का चिह्न है। इसे परसर्ग भी कहते हैं।

प्रस्तुत निबंध में जहाँ-जहाँ इसी परसर्ग ‘पर’ का प्रयोग हुआ है, उन्हें छाँटकर लिखिए ।

उत्तर:

यह पृथ्वी शेषनाग के मस्तक पर स्थित है।

हिन्दुस्तान में कुछ मजदूर खेतों पर काम करते हैं।

वह मजदूरी तो करता है पर उसमें उसे गौरब नहीं लगता।

बेटी समान माना पर मेहनत को हीन माना गया।

शरीर-श्रम की प्रतिष्ठा न मानों, पर महात्मा गांधी तो दिमागी काम करते थे।

3. निम्नलिखित वाक्यों पर ध्यान दीजिए।

जो शख्स पसीने से रोटी कमाता है, वह धर्म-पुरुष हो जाता है।

अगर हम काम की इज्जत नहीं करते तो बड़ा भारी धर्म – कार्य खोते हैं।

शरीर – श्रम करनेवाले को हम नीच मानते हैं।

इन वाक्यों में प्रयुक्त धर्म-पुरुष, धर्म – कार्य और शरीर-श्रम अधिक शब्दों के मेल से बने हैं।

जैसे- धर्म (का) पुरुष
धर्म (का) कार्य
शरीर (का) श्रम
जब एकाधिक शब्द एक-दूसरे से मिल जाते हैं, तब उस मेल को समास कहा जाता है।

समास सात प्रकार के होते हैं-

अव्ययीभाव
तत्पुरुष समास
नञ् तत्पुरुष
कर्मधारय
द्विगु
द्वन्द्व
बहुब्रीहि समास
उपर्युक्त उदाहरण तत्पुरुष समास के हैं

4. ‘आज देहाती लोग भी कहते हैं कि हमारे बच्चों को तालीम मिलनी चाहिए।’ इस वाक्य में ‘आज देहाती लोग भी कहते हैं’ प्रधान वाक्य है और ‘हमारे बच्चों को तालीम मिलनी चाहिए’ आश्रित वाक्य है। इन दोनों वाक्यों को संयोजक अविकारी शब्द ‘कि’ मिलाता है।
याद रखिए:
जिस वाक्य में एक प्रधान वाक्य और एक आश्रित वाक्य हो, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं। रचना की दृष्टि से वाक्य के अनेक भेद पाये जाते हैं – सरल वाक्य, मिश्र वाक्य, संयुक्त वाक्य आदि।

सरल वाक्य: नृत्यांगना चन्द्रिका ने नृत्य महोत्सव में सभी दर्शकों का मन मोहित कर लिया।

मिश्र वाक्य : बाण से घायल एक हंस जब उपवन में गिर पड़ा, तब राजकुमार सिद्धार्थ ने उसे तुरन्त उठा लिया।

संयुक्त वाक्य: पानी में भीगे हुए बच्चे पेड़ पर चढ़ गये और पके पके फल तोड़ने लगे।

5. इस पाठ में जीवन, लोग, काम के आगे क्रमशः धार्मिक, देहाती और दिमागी शब्दों का प्रयोग हुआ है। इन शब्दों से उनकी विशेषता उभर कर आती है। पाठ से कुछ ऐसे ही शब्द छाँटिए जो किसी की विशेषता बता रहे हों।
उत्तर:
ज्ञानी लोग
जूठी पत्तल
सफाई कर्मचारी
थका-माँदा शरीर
जूठी पत्तलें,
फुरसती लोग