BSE Odisha Class 9 Hindi Book Chapter 12 Question Answer | Odisha Board Class 9 Hindi Book Chapter 12 Solutions | Class 9 Hindi Chapter 12 Question Answer Odia Medium

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ममता

प्रश्न और अभ्यास

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दीजिए।

(क) ‘ममता’ कहानी का सारमर्म अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर:
ममता मध्ययुग के रोहतास दुर्ग के ब्राह्मण मन्त्री चूड़ामणि की विधवा पुत्री है। पहले माता और कुछ दिनों के बाद पठानों से हुए संघर्ष में ममता के पिता का मौत हो गयी। मगर मुगल बादशाह हुमायूँ चौसा- युद्ध में शेरशाह से हारकर एक रात ममता की झोंपड़ी में आश्रय लिया। ममता को हुमायूँ का परिचय मालूम न होते हुए भी झोपड़ी में आश्रय देती है। एवं स्वंय पास की टूटी दीवारों में चली जाती। इसके साथ ४७ सालों के बाद अकवर मुगल बादशाह बनते हैं। उस स्थान पर हुमायूँ की स्मृति में एक अष्टकोण मन्दिर बनवाया जाता है, पर मन्दिर में ममता का नाम कहीं भी लिखा नहीं जाता।

(ख) ‘ममता’ कहानी का मुख्य चरित्र कौन है? उसकी चारित्रिक विशेषताओं को बताइए।

उत्तर:रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की इकलैती बेटी ‘ममता’ इस कहानी का मुख्य चरित्र है । ममता स्वाभिमानी थी । जब चूड़ामणि अपनी पुत्री को भेंट स्वरुप स्वर्ण-मुद्रा देना चाहते हैं तो ममता उस स्वर्ण- मुद्रा को यह कहकर लौटा देती है कि हम ब्राह्मण हैं।
इतना सोना लेकर हम क्या करेंगे ? ममता शरणागत की रक्षा करनेवाली महिला थी । जब हुमायूँ विपन्न अवस्था में ममता के पास आते है तब, ममता ब्राह्मण होते हुए भी एक मुगल की प्राणरक्षा करती है । वह हुमायूँ को यह भी कहती है कि मैं ब्राह्मण हूँ, मुझे तो अपने धर्म-अतिथि देव की उपासना का पालन करना चाहिए ।

(ग) इस कहानी से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?

उत्तर:
ब्राह्मण – मन्त्री चूड़ामणि की स्नेहममता विधवा बेटी ममता पर निदक झलक है। ममता विधवा हिन्दु नारी चरित्रको अक्षुर्ण रख सकती। उसने अपने जीवन को मानव सेवा में उत्सर्गिकृत करदिया। उस के साल हमें जीवन में संघर्ष करते हुए जीना चाहिए हमें अपने धर्म और कर्त्तव्य का कभी नहीं छोड़ना चाहिए। विपन्न समय में आए हुए शरणागती की रक्षाकरनी चाहिए।

(घ) इस कहानी में लेखक का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:इस कहानी के माध्यम से लेखक ने भारतीय संस्कृति और पारंपरिक मूल्यबोध को दिखाया हैं ।

 

2. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।

 

(क) रोहतास दुर्ग के प्रकोष्ठ में बैठी हुई युवती ममता किसे देख रही थी?

उत्तर:
रोहतास दुर्ग के प्रकोष्ठ में बैठी हुई युवती ममता शोण के तीक्ष्ण गम्भीर प्रवाह को देख रही थी।

(ख) ममता का यौवन किसके समान उमड़ रहा था?

उत्तर: शोण नदी के समान उमड़ रहा था।

(ग) संसार में सबसे तुच्छ निराश्रय प्राणी कौन है?

उत्तर:
संसार में सबसे तुच्छ निराश्रय प्राणी हिन्दू विधवा है।

(घ) चूड़ामणि क्यों व्यथित हो गये ?

उत्तर: जब ममता शोण के प्रवाह में अपना जीवन मिलाने में बेसुध थी, उस समय वह पिता का आना न जान सकी । तब चूड़ामणि व्यथित हो गये ।

 

(ङ) ममता ने पिता का उपहार क्यों स्वीकार नहीं किया?

उत्तर: ममता ने पिता का उपहार इसलिए स्वीकार नहीं किया कि म्लेच्छ का उत्कोच स्वीकार करना ठीक नहीं है। हम लोग ब्राह्मण है, इतना सोना लेकर क्या करेंगे ?

(च) चूड़ामणि का हृदय क्यों धक् धक् करने लगा ?

उत्तर: दूसरे दिन जब डोलियों का तांता भीतर आ रहा था तब यह देखकर चूड़ामणि का हृदय धक-धक करने लगा ।

(छ) ब्राह्मण – मन्त्री कैसे मारा गया?

उत्तर: चुडामणी ने जाकर रोहतास दुर्ग के तोरण निकट की डोलियों का आवरण खुलवाना चाहा। पठानों ने कहा – यह महिलाओं का अपमान करना है। बात बढ़ गयी, तलवारों खिचीं ब्राह्मण मंत्री मारा गया।

(ज) मौर्य और गुप्त सम्राटों की कीर्त्ति का खण्डहर कहाँ था?

उत्तर: काशी के उत्तर में धर्मचक्र विहार मौर्य और गुप्त सम्राटों की कीर्त्ति का खंडहर था ।

(झ) भारतीय शिल्प की विभूति कहां बिखरी हुई थी ?

उत्तर: भारतीय शिल्प की विभूति भग्नचूड़ा, तृणा-गुल्मों से ढके हुए प्राचीर ईटो के ढेर में बिखरी हुई थी।

(ञ) ‘सब विधर्मी दया के पात्र नहीं’ – ऐसा ममता ने क्यों कहा?

उत्तर: जब ममता ने सोचा कि मेरे पिता का बध करनेवाले आततायी ये घायल व्यक्ति हैं जो मुझसे आश्रय माँगते हैं, तब ममता ने कहा- “सब विधर्मी दया के पात्र नहीं होते।”

(ट) स्त्री क्या विचार कर रही थी?

उत्तर: स्त्री विचार कर रही थी – “मै ब्राह्मण हूँ, मुझे तो अपने धर्म – अतिथि देव की उपसना का पालन करना चाहिए, परन्तु यहाँ सब विधर्मी दया के पात्र नहीं, मगर दया तो नहीं कर्त्तव्य करना है।

(ठ) ममता ने मन में क्या कहा?

उत्तर: ममता ने मन में कहा- “यहाँ कौन दुर्ग है ? यही झोंपड़ी है, जो चाहे ले, ले। मुझे तो अपना कर्तव्य करना पड़ेगा ।

(ड) किसके प्रकाश में मुगल ने ममता का मुखमण्डल देखा?

उत्तर: चन्द्रमा के प्रकाश में मुगल ने ममता का मुखमण्डल देखा।

(ढ) ममता ने मुगल से क्या कहा?

उत्तर: ममता ने मुगल से कहा “जाओ भीतर, थके हुए भयभीत पथिक तुम चाहे कोई हो, मैं तुम्हें आश्रय देती हूँ। मैं – ब्राह्मण कुमारी हूँ, सब अपना धर्म छोड़ दें तो मैं भी क्यों छोड़ दूँ |

(ण) प्रभात में खण्डहर की सन्धि से ममता ने क्या देखा?

उत्तर: प्रभात में खण्डहर की सन्धि से ममता ने सैकड़ों अश्वारोहियों को देखा।

(त) किस युद्ध को बहुत दिन बीत गये?

उत्तर: चौसा के मुगल-पठान युद्ध को बहुत दिन बीत गये ।

(थ) हुमायूँ ने एक दिन कहाँ विश्राम किया था?

उत्तर: हुमायूँ ने एक दिन ममता की झोंपड़ी में विश्राम किया था।

(द) हुमायूँ कौन था? उसका युद्ध किससे और कहाँ हुआ?

उत्तर: हुमायूँ मुगल बादशाह था। उसका युद्ध शेरशाह से चौसा में हुआ ।

(ध) हुमायूँ ने मिरजा से क्या करने के लिए कहा?

उत्तर: हुमायूँ ने मिरजा से यह करने के लिए कहा- “उस स्त्री को मैं कुछ भी ‘न दे सका, उसका घर बनवा देना इसलिए कि विपति में मैने यहाँ आश्रय पाया था।

(न) ममता ने अश्वारोही से क्या कहा?

उत्तर: ममता ने अश्वारोही से कहा -” “भगवान ने सुन लिया, मैं आज इसे छोड़े जाती हूँ । अब तुम इस झोपड़ी का मकान बनाओ या महल, मैं अपने चिर विश्राम गृह में जाती हूँ |

 

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में दीजिए।

(क) रोहतास दुर्गपति के मन्त्री कौन थे?

उत्तर:
चूडामणि

(ख) ममता किसकी पुत्री थी?

उत्तर: ममता चूड़ामणि की एक इकलौती बेटी थी ।

(ग) शोण के प्रवाह में अपना जीवन मिलाने में कौन बेसुध थी?

उत्तर: ममता

(घ) सुनहली सन्ध्या में किसका पीलापन विकीर्ण होने लगा?

उत्तर: सुनहली संध्या में सुवर्ण का पीलपन विकीर्ण होने लगा ।”

(ङ) म्लेच्छ का उत्कोच किसने स्वीकार किया था?

उत्तर: चूड़ामणि

(च) किसने कहा कि ‘माता’, मुझे आश्रय चाहिए?

उत्तर: हुमायूँ ने कहा कि ‘माता’ मुझे आश्रय चाहिए ।

(छ) कौन-से युद्ध में शेरशाह से विपन्न होकर मुगल रक्षा चाहता था?

उत्तर: चौसा

(ज) किसने सोचा कि उसे अतिथि – देव की उपासना का पालन करना चाहिए?

उत्तर: ममता ने सोचा कि उसे अतिथि देव की उपासना का पालन करना चाहिए ।

(झ) ‘भाग्य का खेल है’- यह वाक्य किसने कहा?

उत्तर :भाग्य का खेल है’ यह वाक्य हुमायूँ ने कहा ।

(ञ) सैनिकों के खोजने पर ममता कहाँ चली गयी?

उत्तर : सौनिकों के खोजने पर ममता मृगदाव में चली गयी ।

(ट) किसका जीर्ण-कंकाल खांसी से गूंज रहा था?

उत्तर: ममता का

(ठ) ममता की सेवा के लिए गांव की कितनी स्त्रियां उसे घेर कर बैठी थीं?

उत्तर: दो-तीन

(ड) कौन अवाक् खड़ा था?

उत्तर: अश्वारोही अवाक् खड़ा था ।

(ढ) ममता की झोंपड़ी पर कौन-सा मन्दिर बना?

उत्तर: अष्टकोण

(ण) सातों देशों का नरेश कौन था?

उत्तर: सातों देशों का नरेश हुमायूँ था ।

(त) गगनचुम्बी मन्दिर किसने बनवाया?

उत्तर: अकबर

(थ) किसमें ममता का नाम नहीं था?

उत्तर: अष्टकोण मंदिर के शिलालेख में ममता का नाम कहीं नहीं था ।

(द) किसने कहा कि ‘यह महिलाओं का अपमान करना है’?

उत्तर: पठानों ने

(ध) ममता को एक स्त्री ने किससे जल पिलाया?

उत्तर: ममता को एक स्त्री ने सीपी से जल पिलाया ।

4. निम्नलिखित अवतरणों को पढ़कर उनका आशय स्पष्ट कीजिए।

(क) उसका यौवन शोण के समान ही उमड़ रहा था।

उत्तर:
उसका यौवन _____________उमड़ रहा था।
प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘ममता’ नामक कहानी से ली गयी है। यहाँ प्रसाद जी ने ममता की यौवन की शोण नदी के साथ तुलना की । रोहतास दुर्ग के प्रकोष्ठ में बैठी हुई युबती ममता शोण के तीक्ष्ण गम्भीर प्रवाह को देख रही थी । ममता विधवा थी मगर ममता की उम्र कम थी; वे उस समय में पूर्ण यौवन में भरपूर रही थी। नदी जिस तरह पूर्ण यौवन प्राप्त होकर बह रही थी, उसी तरह ममता की जवानी में प्रवाह थी।

(ख) शोण के प्रवाह में वह अपना जीवन मिलाने में बेसुध थी।

उत्तर:
शोण के ______________ बेसुध थी।
यह पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तक रचित ‘ममता’ कहानी से ली गई है। इसमें लेखक ने ममता की चिंता और अकेलेपन का वर्णन किया है। यहाँ जिस प्रकोष्ठ में ममता भग्न हृदय को लेकर बैठी थी; उस समय में पिता चूड़ामणि प्रवेश किया। चूड़ामणि व्यथित हो उठे। वे स्नहपालिता पुत्री के लिए क्या करे, यह स्थिर न कर सकते थे, लेकिन ममता अपने जीवन को नदी के साथ तल्लीन कर देती थी।

(ग) इस पतनोन्मुख प्राचीन सामन्त वंश का अंत समीप है।

उत्तर:
इस पतनोन्मुख____________समीप है।
यह पंक्ति ‘ममता’ कहानी से ली गई है । इस कहानी के रचयिता जयशंकर प्रसादजी हैं। मंत्री चूड़ामणि को यह डर था कि कभी भी पठान हमारे ऊपर आक्रमण कर सकते हैं । इस सामन्त वंश का अंत समीप है । हमारा पतन निश्चित है । किसी भी दिन शेरशाह रोहतास पर अधिकार कर सकता है। उस दिन मंत्रित्व न रहेगा । यह स्वर्ण थाल का उपहार तब के लिए है।

(घ) परन्तु तुम भी वैसे ही क्रूर हो। वही भीषण रक्त की प्यास, वही निष्ठुर प्रतिबिम्ब तुम्हारे मुख पर भी है।

उत्तर:
परन्तु तुम_____________पर भी है।
प्रस्तुत पंक्ति पठित कहानी ‘ममता’ से ली गई है। इस पर वर्णन है कि मुगल बादशाह हुमायूँ चौसायुद्ध में शेरशाह से हारकर एक रात को ममता की झोपड़ी में पहुंचता है और आश्रय की भीक्षा मांगते हैं परन्तु ममता ने कहा तुम भी वैसी ही निष्ठुर हो। वही भीषण रक्त की प्यास के साथ निष्ठुर प्रतिविम्व तुम्हारे मुख पर देख सकते है। मेरी झोंपड़ी में स्थान नहीं आज कंही दूसरा स्थान में आश्रय खोज लो। इस तरह में एक अनजान आदमी को आश्रय देने में असमर्थ हूँ।

(ङ) मैं ब्राह्मण – कुमारी हूँ, सब अपना धर्म छोड़ दें तो मैं भी क्यों छोड़ दूँ?

उत्तर:
मैं ब्राह्मण _________ छोड़ दूँ?
यह पंक्ति ‘ममता’ नामक कहानी से ली गई है । इस कहानी के रचयिता जयशंकर प्रसादजी हैं । इस पंक्ति में लेखक ने धर्म और कर्त्तव्य के बीच सामंजस्य बैठाया है। आश्रयदाता को आश्रय देते समय ममता के मन यह विचार आता है कि यहाँ कौन दुर्ग है। यही झोंपड़ी है, जो चाहे ले ले । मुझे तो अपना कर्त्तव्य करना पड़ेगा । ” ममता बोली जाओ भीतर । तुम चाहे कोई हो, मैं तुम्हें आश्रय देती हूँ । मैं ब्राह्मण कुमारी हूँ, सब अपना धर्म छोड़ दें तो मैं भी क्यों छोड़ दूँ ?”

(च) उस स्त्री को मैं कुछ भी न दे सका।

उत्तर:
उस स्त्री ____________ देसका
यह पंक्ति ममता कहान से आगत है। ममता हुमायूँ को रात में आश्रय अपनी कुटिया में देने के बाद, वे उस स्थान छोड़कर चली गयी मगर रात बीत गई। सुवह उस स्थान में ममता नहीं मिली। ममता को खोजने के लिए हूमायूँ मिरजा को आदेश दिया। उसने मुझपर जो उपकार किया उसके बदले मैं कुछ भी न दे सका।

(छ) अब तुम इसका मकान बनाओ या महल, मैं अपने चिर विश्राम गृह में जाती हूँ।

उत्तर:
अब तुम ___________जाती हूँ।
यह पंक्ति ‘ममता’ नामक कहानी से ली गई है। इस कहानी के रचयिता जयशंकर प्रसादजी हैं। ममता की झोंपड़ी को खोजते हुए जब अश्वारोही उसके पास आया तो ममता ने उससे कहा- मैं नहीं जानती वह शंहशाह था । या साधारण मुगल, पर एक दिन इसी झोंपड़ी के नीचे वह रहा था । मैंने सुना था, वह मेरा घर बनाने की आज्ञा दे गया था । मैं आजीवन अपनी झोंपड़ी खुदवाने के डर से भयभीत रही थी ।भगवान ने सुन लिया, मैं आज इसे छोड़े जाती हूँ । अब तुम इसका मकान बनाओ या महल, मैं अपने चिर विश्राम गृह में जाती हूँ ।” वह अश्वारोही अवाक् खड़ा था । बुढ़िया के प्राण- पक्षी अनन्त में उड़ गये ।

5. निम्नलिखित वाक्यों को ‘किसने’ और ‘किससे’, कहा?

(क) क्या आपने म्लेच्छ का उत्कोच स्वीकार कर लिया?

उत्तर:
ममता ने अपने पिता चूड़ामणि से कहा।

(ख) यह महिलाओं का अपमान करना है।

उत्तर:
पठानों ने ब्राह्मण मंत्री चूड़ामणि से कहा।

(ग) माता, मुझे आश्रय चाहिए।

उत्तर: हूमायूँ ने ममता से कहा।

(घ) गला सूख रहा है, साथी छूट गये हैं, अश्व गिर पड़ा है।

उत्तर: मुगल बादशाह ने ममता से कहा।

(ङ) उस स्त्री को मैं कुछ भी न दे सका।

उत्तर: हुमायूँ ने मिरजा से कहा।

भाषाज्ञान

प्रस्तुत कहानी में अनेक तत्सम शब्द आये हैं। जैसे- कंटक, दुर्गपति, निराश्रय आदि। याद रखो : तत्सम शब्द ‘तत्’ और ‘सम’ के योग से वना है। इसका अर्थ है, उसके समान – यानी संस्कृत के समान। संस्कृत के जो शब्द हिन्दी में ज्यों के त्यों प्रयुक्त होते है, उन्हों तत्सम शब्द कहते है, जैसे – भ्राता, सुन्दर, पुष्प, सूर्य, आत्मा आदि।
इसी तरह इस पाठ में आए तत्सम शब्दों को छाँटिए और उनका अर्थ लिखिए।

उत्तर:
दुश्चिन्ता, व्यथित, उत्कोच ___________ आदि।
इस तरह बच्चों शिक्षक/शिक्षिका की सहायता लेकर कहानी से तत्सम शब्दों को छाँटिए।