Odisha Board Class 8 Hindi Kalika Chapter 1 Question Answer (कबीर के दोहे). These Question Answer, updated for 2026-27, Which help you score higher in your Class 8 board Hindi exams.
Odisha Board Class 8 Hindi Chapter 1 Question Answer – कबीर के दोहे
- प्रश्न और उत्तर
प्रश्न 1.
गुरु भगवान से बड़े हैं। यह विषय कबीर के कौन से दोहे में वर्णित है? इसके बारे में आप कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
यह विषय कबीर दास जी के पहले दोहे में वर्णित है। दोहा इस प्रकार है:
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय ।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय ।।”
इस दोहे में कबीर जी ने बताया है कि गुरु का स्थान भगवान से भी ऊँचा होता है, क्योंकि वे ही हमें भगवान तक पहुँचने का सही रास्ता बताते हैं।
प्रश्न 2.
साधु के स्वभाव के बारे में आप क्या जानते हैं? इस पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
कबीर दास जी के अनुसार साधु का स्वभाव सूप (अनाज साफ़ करने वाले छाज) के समान होना चाहिए। जैसे सूप अच्छे और सार्थक अनाज को अपने पास रख लेता है और हल्के कचरे या भूसे को उड़ा देता है, वैसे ही साधु पुरुष समाज से अच्छे गुणों को अपनाते हैं और बुरी बातों को छोड़ देते हैं।
प्रश्न 3.
मीठी वाणी या मीठे वचन बोलने से हमें क्या लाभ मिलता है? इसके बारे में कक्षा में बताइए।
उत्तर:
मीठी वाणी बोलने से सुनने वाले को अपार खुशी मिलती है और उसका मन प्रसन्न हो जाता है। इसके साथ ही, मीठा बोलने वाले व्यक्ति का अपना मन भी शांत, शीतल और तनावमुक्त रहता है। मीठे वचन बोलने से समाज में आपस में प्यार, सद्भावना और सम्मान बढ़ता है।
प्रश्न 4.
हम बड़े लोग किन्हें कहेंगे? बड़े लोगों का लक्षण क्या है? इस पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
हम उन्हें बड़ा कहेंगे जो हमेशा दूसरों की मदद करते हैं और जिनके मन में परोपकार की भावना होती है। केवल शरीर, उम्र या धन-दौलत में बड़ा होने से कोई बड़ा नहीं होता। बड़े लोगों का लक्षण यह है कि वे खजूर के पेड़ की तरह सिर्फ ऊँचे नहीं होते, बल्कि वे अपने कर्मों से दूसरों के काम आते हैं और लोगों को सुख देते हैं।
प्रश्न 5.
निंदा करनेवाले लोग परोक्ष में हमारा क्या उपकार करते हैं, सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर:
निंदा करने वाले लोग (निंदक) हमेशा हमारी कमियाँ और गलतियाँ हमें बताते रहते हैं। उनकी आलोचनात्मक बातें सुनकर हम अपनी त्रुटियों को सुधार सकते हैं। इस प्रकार, वे बिना साबुन और पानी के ही हमारे स्वभाव और चरित्र को एकदम साफ, निर्मल और पवित्र बना देते हैं।
सोचिए और लिखिए
(क)
‘गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय’ इस दोहे में किसके बारे में कहा गया है ?
(A) श्रम के महत्व
(B) ज्ञान के महत्व
(C) गुरु के महत्व
(D) भक्ति के महत्व
उ. (C) गुरु के महत्व
(ख)
‘साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय । सार सार को गहि रहै थोथा देइ उड़ाय’ । इस दोहे में साधु के स्वभाव के बारे में क्या कहा गया है ?
(A) साधु का स्वभाव सूप जैसा है ।
(B) साधु का स्वभाव नम्र होता है ।
(C) साधु स्वभाव से धीर होते हैं ।
(D) साधु स्वभाव से अहंकारी होते हैं।
उ. (A) साधु का स्वभाव सूप जैसा है ।
(ग)
‘ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय । औरन को सीतल करै आपहुँ सीतल होय ।’ इस दोहे के अनुसार मधुर वचन बोलने से क्या लाभ मिलता है ?
(A) लोग हमारी प्रशंसा करने लगते हैं ।
(B) किसी के साथ विवाद होने पर उसमें जीत मिलती है।
(C) सुनने वालों का मन इधर-उधर भटकने लगता है।
(D) स्वयं को और दूसरों को मानसिक शांति मिलती है।
उ. (D) स्वयं को और दूसरों को मानसिक शांति मिलती है ।
(घ)
निम्नलिखित में से किस पेड़ के नीचे पथिक को छाया नहीं मिलती ?
(A) आम के
(B) मौलश्री के
(C) बरगद के
(D) खजूर के
उ. (D) खजूर के
(ङ)
‘निंदक नियरे राखिए आँगन कुटी छवाय’ इस पंक्ति के अनुसार हमें किस दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए ?
(A) निंदा करने वालों से बचना चाहिए ।
(B) निंदकों को दूर रखना चाहिए ।
(C) निंदा करने वालों को पास रखना चाहिए ।
(D) निंदको की निंदा करनी चाहिए ।
उ. (C) निंदा करने वालों को पास रखना चाहिए ।
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए :
(क) गुरु और गोविंद दोनों हमारे सामने खड़े हैं तो हमें किनके चरण पहले छूने चाहिए ?
उ. जब गुरु और गोविंद दोनों हमारे सामने खड़े हों, तो हमें सबसे पहले अपने गुरु के चरण छूने चाहिए।
(ख) साधु का स्वभाव कैसा होना चाहिए ?
उ. साधु का स्वभाव सूप के समान होना चाहिए, जो अच्छी चीज़ों को रख लेता है और बुरी चीज़ों को हटा देता है।
(ग) मनुष्यों को कैसी वाणी बोलनी चाहिए ?
उ. मनुष्यों को अपने मन का सारा अहंकार छोड़कर हमेशा मीठी वाणी बोलनी चाहिए।
(घ) दोहे में खजूर के पेड़ के बारे में क्या कहा गया है ?
उ. दोहे में कहा गया है कि खजूर का पेड़ बहुत बड़ा होता है, लेकिन वह किसी यात्री को छाया नहीं दे पाता और उसके फल भी बहुत दूर (ऊँचाई पर) लगते हैं।
(ङ) कौन पानी और साबुन के बिना हमारे मन को निर्मल कर देता है ?
उ. हमारी निंदा करने वाला व्यक्ति (निंदक) पानी और साबुन के बिना ही हमारे स्वभाव और मन को निर्मल कर देता है।
- निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दीजिए :
(क) साधु के स्वभाव की तुलना किसके साथ की गई है और क्यों ?
उ. साधु के स्वभाव की तुलना सूप (अनाज साफ़ करने वाले छाज) के साथ की गई है। सूप अनाज को साफ़ करते समय अच्छे और भारी अनाज को अपने पास रख लेता है और कूड़े-कचरे को बाहर उड़ा देता है। इसी तरह एक सच्चा साधु भी दुनिया की अच्छी बातों को ग्रहण करता है और बुरी बातों को छोड़ देता है।
(ख) मधुर वाणी बोलने से क्या फायदा मिलता है ?
उ. मधुर वाणी बोलने से सुनने वाले लोगों को बहुत खुशी और शांति मिलती है। इसके साथ ही मधुर बोलने वाले व्यक्ति का अपना मन भी अहंकार मुक्त, शांत और शीतल हो जाता है। मीठे बोल बोलने से आपसी मतभेद दूर होते हैं और समाज में प्यार और अपनापन बढ़ता है।
(ग) निंदक की बात क्यों सुननी चाहिए ?
उ. निंदक व्यक्ति हमेशा बिना किसी स्वार्थ के हमारे दोष और हमारी कमियाँ बताता है। उसकी बातें सुनकर हम आसानी से अपने अंदर की बुराइयों को पहचान सकते हैं और उन्हें दूर कर सकते हैं। इस प्रकार निंदक की बातें हमारे चरित्र को बिना साबुन और पानी के साफ और पवित्र बना देती हैं।
(घ) कवि के अनुसार गुरु गोविंद से भी श्रेष्ठ कैसे होते हैं?
उ. कवि कबीर दास जी मानते हैं कि भगवान तक पहुँचने का सही रास्ता और ज्ञान केवल गुरु ही दिखाते हैं। गुरु के मार्गदर्शन के बिना ईश्वर की प्राप्ति असंभव है। इसलिए, भगवान की पहचान कराने वाले गुरु का स्थान स्वयं भगवान से भी बड़ा और श्रेष्ठ होता है।
अनुमान और कल्पना (प्रश्नोत्तर)
- आप के जीवन में गुरु का महत्व क्या है ? बताइए ।
उ. मेरे जीवन में गुरु का बहुत बड़ा महत्व है। गुरु ही मुझे सही और गलत का अंतर समझाते हैं। वे मुझे ज्ञान देते हैं और जीवन में एक अच्छा इंसान बनने का रास्ता दिखाते हैं। उनके बिना मेरा जीवन बिल्कुल अंधकारमय हो जाएगा।
- अनुमान लगाइए कि यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक नहीं होता तो क्या होता ?
उ. यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक नहीं होता, तो चारों तरफ केवल अज्ञानता का अँधेरा होता। मनुष्यों को सही ज्ञान और अच्छे संस्कार नहीं मिल पाते। दुनिया में विज्ञान, कला और साहित्य का कोई विकास नहीं हो पाता और पूरी मानव सभ्यता पीछे रह जाती।
- सूप का काम क्या होता है? हम सूप के स्वभाव से क्या सीख सकते हैं ?
उ. सूप का मुख्य काम अनाज को फटक कर साफ़ करना होता है। वह अच्छे अनाज को बचा लेता है और हल्के कूड़े-कचरे को बाहर फेंक देता है। सूप के स्वभाव से हम यह सीख सकते हैं कि हमें भी अपने जीवन में हमेशा अच्छी बातों और गुणों को अपनाना चाहिए और बुरी आदतों या विचारों को त्याग देना चाहिए।
- कल्पना कीजिए कि यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर बना लेंगे तो समाज में क्या परिवर्तन आ जाएगा ?
उ. यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर बना लेंगे, तो समाज में होने वाले आपसी वाद-विवाद और लड़ाई-झगड़े पूरी तरह खत्म हो जाएँगे। हर जगह केवल शांति, प्रेम और भाईचारे का माहौल होगा। सभी लोग एक-दूसरे का सम्मान करेंगे और हमारा समाज बहुत सुंदर और खुशहाल बन जाएगा।
- खजूर, ताड़ और नारियल जैसे पेड़ों के नीचे छाया नहीं होती पर ये पेड़ बहुत ही उपयोगी होते हैं । इन पेड़ों की उपयोगिता बताइए ।
उ. खजूर, ताड़ और नारियल के पेड़ भले ही राहगीरों को छाया नहीं देते, लेकिन वे अत्यंत उपयोगी होते हैं। नारियल से हमें पीने का मीठा पानी और पौष्टिक फल मिलता है। इन पेड़ों के पत्तों से चटाई, झाड़ू, टोकरी और घरों की छतें बनाई जाती हैं। इसके साथ ही, इनके तने की लकड़ियाँ भी बहुत मजबूत और निर्माण कार्य के लिए उपयोगी होती हैं।
- यदि समाज में कोई किसी की आलोचना न करें तो क्या होगा ? लाभ या हानि ? अपने विचार कक्षा में साझा कीजिए ।
उ. यदि समाज में कोई किसी की आलोचना नहीं करेगा, तो इसमें मुख्य रूप से हमारी हानि ही होगी। सही और रचनात्मक आलोचना के बिना हमें अपनी कमियों और गलतियों का कभी पता नहीं चलेगा। यदि हमें अपनी गलतियाँ नहीं दिखेंगी, तो हम खुद में सुधार नहीं कर पाएँगे, जिससे हमारा व्यक्तिगत और सामाजिक विकास रुक जाएगा।
भाषा-ज्ञान (व्याकरण)
निम्नलिखित शब्दों का खड़ीबोली हिंदी रूप लिखिए :
दोऊ — दोनों
काके — किसके
सुभाय — स्वभाव
सीतल — शीतल
बानी — वाणी
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :
गुरु — शिक्षक, आचार्य
गोविंद — भगवान, ईश्वर
साधु — सज्जन, संत
पेड़ — वृक्ष, तरु
पंथी — यात्री, राहगीर
कुटी — झोपड़ी, कुटिया
पानी — जल, नीर
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :
साधु — असाधु (या दुष्ट)
सार — निस्सार (या थोथा)
बड़ा — छोटा
गुरु — शिष्य
निर्मल — मलिन
कबीर दास जी के दोहों से तुकांत शब्द (Rhyming Words) छाँटकर लिखिए :
पाँय — बताय
सुभाय — उड़ाय
खोय — होय
खजूर — दूर
छवाय — सुभाय